'असीम मुनीर को इज्जत बचाने का रास्ता चाहिए', अचानक दिल्ली पहुंचे पूर्व पाकिस्तानी राजदूत, क्या सुधरेंगे रिश्ते?
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10-10-2026 12:21 PM
लंदन/इस्लामाबाद: भारत और पाकिस्तान के बीच पर्दे के पीछे बंद कमरों में 'बैकचैनल बातचीत' का दौर शुरू होने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। किंग्स कॉलेज लंदन की वॉर स्टडीज डिपार्टमेंट की सीनियर फेलो और पाकिस्तान की सेना में गहरी पैठ रखने वाली पाकिस्तानी राजनीतिक विश्लेषक डॉ. आयशा सिद्दीका ने एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया है कि पाकिस्तान के एक पूर्व राजदूत इन दिनों दिल्ली में हैं। उन्होंने कहा कि उस राजदूत को भारत का वीजा दे दिया गया है जबकि पिछले साल उनके वीजा एप्लीकेशन को खारिज कर दिया गया था।पाकिस्तान के पत्रकार रजा रूमी से बात करते हुए डॉ. आयशा सिद्दीका ने दावा किया है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर भारत के साथ शांति स्थापित करने के पक्ष में हैं लेकिन इसके लिए उन्हें अपने देश के भीतर साख बचाने के लिए एक 'फेस-सेवर' की सख्त तलाश है। उन्होंने कहा है कि दोनों देशों के बीच जो ट्रैक-2 बैकचैनल बातचीत की गई है उसमें भी पाकिस्तान के एक पूर्व सैन्य अधिकारी ने कहा गया है कि 'आर्मी चीफ शांति चाहते हैं लेकिन उनकी इज्जत बनी रहे।'क्या भारत-पाकिस्तान में हो रही बैकचैनल बातचीत?
डॉ. आयशा सिद्दीका ने कार्यक्रम में बोलते हुए ये दावा किया कि एक पूर्व वरिष्ठ पाकिस्तानी राजदूत को भारत का वीजा मिला है जिसे अनौपचारिक संपर्क साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा 'वीजा मिलने से कुछ संकेत मिलते हैं कि कुछ सकारात्मक उम्मीद है। SCO की बैठक में भारतीय अधिकारी इस्लामाबाद आए थे और इस दौरान उनके साथ अच्छा सलूक किया गया। अगले साल पाकिस्तान में एससीओ शिखर सम्मेलन होना है तो पाकिस्तान कोशिश कर रहा है कि नरेन्द्र मोदी इसमें शामिल होने आएं और पाकिस्तान पर अमेरिका का प्रेशर है कि भारत से संबंध सामान्य करे क्योंकि अमेरिका को मिडिल ईस्ट में पाकिस्तान की जरूरत है।'डॉ. आयशा सिद्दीका ने कहा 'भारत और पाकिस्तान के पूर्व अधिकारियों के बीच ट्रैक-2 की बैठकें कई बार हुई हैं और एक पाकिस्तान के पूर्व सीनियर अधिकारी जो असीम मुनीर के करीबी हैं और अकसर उनसे मिलते हैं उन्होंने भारतीय पूर्व अधिकारियों से कहा है कि आर्मी चीफ शांति चाहते हैं लेकिन उन्हें फेस सेवर चाहिए।' माना जा रहा है कि पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी दिल्ली आए हैं। हुसैन हक्कानी उन डिप्लोमेट्स में हैं जिन्होंने डिप्लोमेटिक परंपरा अभी भी निभाई है और भारत के खिलाफ जहर नहीं उगला है। ऐसे में उनके लिए भारतीय सर्किल में बात करना आसान है। वो अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रह चुके हैं।उन्होंने आगे कहा 'पाकिस्तान के पूर्व राजदूत जो दिल्ली भेजे गये हैं वो काफी दिलचस्प घटनाक्रम है। उनके भेजने का मकसद ये है कि वो भारतीय सर्किल में बातचीत का एक माहौल तैयार करें। उनकी कोशिश ये है कि कम से कम दोनों देशों के इंटेलिजेंस एजेंसियों के बीच बातचीत शुरू हो जाए। सरकार से सरकार नहीं बल्कि सैन्य स्तर पर बातचीत।'पाकिस्तान की 'शांति' की पेशकश के पीछे क्या है असीम मुनीर का डर?
डॉ. आयशा सिद्दीका ने कहा 'भारत कुछ हद तक इसमें दिलचस्पी रखता है लेकिन आर्टिकल-370 के नजरिए से कि पाकिस्तान अब आर्टिकल-370 भूल जाए।' उन्होंने कहा 'भारत चाहता है पाकिस्तान में अब आर्टिकल 370 की चर्चा भी ना हो। और हकीकत ये है कि 370 का असर भारत में नहीं आपके यहां (पाकिस्तान) में हुआ है कि वहां विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये। वो अधिकार मांगने लगे हैं और वो समझ गये हैं कि कश्मीर को दिला नहीं सकते।'