35 साल नौकरी करने के बाद डॉक्टर ने रिटायरमेंट के बाद खेती शुरू की। कलकत्ता से लाकर ड्रैगन फ्रूट के 700 पौधे लगाए, लेकिन एक गलती से सारे खराब हो गए। एक लाख रुपए का नुकसान हुआ। गलती से सीखकर वापस अलग-अलग वैरायटी के 3500 पौधे लगाए। फ्रूट की स्थानीय बाजार में अच्छी मांग के साथ भाव भी अच्छे मिल जाते हैं।

डॉक्टर सियाराम का कहना है किसान खेतों में दिन रात मेहनत करता है, लेकिन फिर भी अच्छा मुनाफा नहीं मिलता है। एक्ट्रा इनकम के लिए बागवानी भी साथ में करनी चाहिए।


35 साल नौकरी की, अब खेत और पेड़-पौधों के बीच मिलता है सुकून

वजीरपुर तहसील के मोहचा गांव निवासी डॉ. सियाराम मीना ने 35 साल तक डॉक्टर की नौकरी की। 1987 में अजमेर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया और 1988 में नौकरी शुरू की। करौली जिले के सीएचसी बालघाट में सीनियर मेडिकल ऑफिसर के पद से 31 अगस्त 2022 को रिटायर हुए। उनके पिता भरोसीलाल मीना किसान थे।

सियाराम को भी पढ़ाई के समय से ही पेड़-पौधों और खेती में रुचि थी। नौकरी के दौरान वे बंटाई पर खेती करवाते थे, लेकिन रिटायरमेंट के बाद उन्होंने खुद खेती करने का फैसला किया। अब वे घर पर प्रैक्टिस करने के साथ खेती भी करते हैं। उनके पास अभी 17 एकड़ जमीन है। उनके दो बेटे हैं। बड़ा बेटा प्रशांत सरकारी टीचर है, जबकि छोटा बेटा रियांश डॉक्टर है। साल 2024 में 84 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया।


शुरुआत में 700 पौधे लगाए, ज्यादा पानी से सभी खराब हो गए

डॉ. सियाराम मीना ने बताया- मुझे शुरू से ही खेती और पेड़-पौधों में रुचि थी। पिता किसान थे, इसलिए खेती को करीब से देखा था। नौकरी के दौरान खुद खेती करने का ज्यादा समय नहीं मिल पाता था। 2022 में रिटायर होने के बाद लगा कि अब अपने शौक को पूरा करने का मौका मिला है।

मैं चाहता था कि ऐसी खेती करूं, जिसमें पारंपरिक फसलों के मुकाबले पानी कम लगे और आमदनी भी अच्छी हो। साल 2024 की शुरुआत में कलकत्ता से ड्रैगन फ्रूट के 700 पौधे मंगवाए। एक पौधा करीब 100 रुपए का पड़ा था, लेकिन ज्यादा पानी देने के कारण सभी पौधे खराब हो गए।

इस नुकसान से समझ आया कि ड्रैगन फ्रूट की खेती में पानी की सही मात्रा और खेत में जल निकासी की व्यवस्था सबसे जरूरी है। इसके बाद उन्होंने खेती के तरीके को समझा।


खेती का तरीका बदला, पहले सीजन में 4 लाख रुपए कमाए

डॉ. सियाराम ने बताया- पहली बार पौधे खराब होने से नुकसान हुआ, लेकिन मैंने खेती छोड़ने के बजाय इसकी कमियों को समझा। ड्रिप सिस्टम से सिंचाई शुरू की। जून 2026 में फल आने शुरू हो गए। अक्टूबर तक पांच बार उत्पादन ले चुके हैं। अब तक 20 क्विंटल ड्रैगन फ्रूट स्थानीय बाजार में 200 रुपए प्रति किलो से बिका है। पहले ही सीजन में करीब 4 लाख रुपए की कमाई हुई है।


एक एकड़ में 3500 पौधे, अलग-अलग वैरायटी लगाईं

डॉ. सियाराम ने बताया- खेत में सेमरेड के 600, मोरक्कन रेड के 600, श्रीलंकन रेड के 600 और क्रॉस वैरायटी के 600 पौधे हैं। इसके अलावा एलडी-1, ताइवानी पिंक, मलेशियन रेड और ऑसीगोल्ड जैसी वैरायटी के पौधे भी लगाए हैं। कुल मिलाकर एक एकड़ में करीब 3500 पौधे हैं।

सेमरेड और मोरक्कन रेड वैरायटी में फल ज्यादा आते हैं और उनका आकार भी अच्छा होता है। एक फल का वजन करीब 200 ग्राम से आधा किलो तक हो सकता है। पौधा सामान्य तौर पर एक साल में फल देना शुरू कर देता है, जबकि दो साल में पूरी तरह विकसित होने पर फल का आकार बढ़ जाता है।

25 साल तक पौधे से होती है कमाई

डॉ. सियाराम ने बताया- एक बार पौधा लगाने के बाद इससे 20 से 25 साल तक फल मिल सकते हैं। रोपाई के 12 से 15 महीने बाद फल आने शुरू हो जाते हैं। पहली हार्वेस्टिंग के करीब 35 दिन बाद दूसरी तुड़ाई होती है और एक सीजन में 6 से 7 बार तक तुड़ाई की जा सकती है।

अब ड्रैगन फ्रूट की खेती का रकबा बढ़ाने के साथ एप्पल और एलियन बेर लगाने की भी सोच रहे हैं। उनके मुताबिक एलियन बेर का आकार सेब के बराबर होता है।


डॉ. सियाराम ने बताया - ड्रैगन फ्रूट कैक्टस प्रजाति का फल है, जिसे कम पानी की जरूरत होती है। इसकी खेती के लिए 20 से 40 डिग्री सेल्सियस तापमान और रेतीली या बलुई दोमट मिट्टी, जिसका पीएच 5.5 से 7 के बीच हो, उपयुक्त मानी जाती है। इसकी खेती बीज से भी हो सकती है, लेकिन कटिंग यानी पौधे की कलम से लगाना बेहतर तरीका है। कलम को काटकर जमीन में लगाया जाता है।

10 फीट की दूरी पर रखें खंभे

दिसंबर के बाद इसमें फुटान होने पर मार्च में खेत में लगाया जा सकता है। खेत तैयार करने के लिए पहले जुताई करके जमीन को समतल किया जाता है। इसके बाद दो फीट चौड़े और एक फीट ऊंचे बेड बनाए जाते हैं। बेड के ऊपर करीब 6 इंच कंपोस्ट की परत डाली जाती है।

एक एकड़ में लगभग 10 ट्रॉली खाद लगती है, जिस पर करीब 25 हजार रुपए खर्च होते हैं। इसके बाद बेड पर मिट्टी डालकर खाद को मिलाया जाता है और पौधे लगाए जाते हैं। पौधों की कतार से कतार की दूरी 10 फीट और पौधे से पौधे की दूरी करीब डेढ़ फीट रखी जाती है। खंभों के बीच भी 10 फीट की दूरी रखते हैं।


इंटर क्रॉप के लिए बढ़ा सकते हैं दूरी

दो पोल पर आठ-आठ पौधे और बीच की जगह में आठ पौधे लगाने की व्यवस्था बताते हैं। बेड के बीच की दूरी बढ़ाकर दूसरी फसल भी ली जा सकती है। ड्रैगन फ्रूट के पौधों को दूसरी फसलों से आम तौर पर परेशानी नहीं होती। सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम लगाया है।

गर्मियों में करीब 7 दिन और सर्दियों में 15 दिन के अंतराल पर पानी देने की जरूरत होती है। जनवरी और फरवरी में पौधा सुप्त अवस्था में रहता है, जबकि मार्च से जून तक बढ़वार का समय रहता है। जुलाई से दिसंबर तक फल आने और उत्पादन लेने का समय होता है।


धूप से बचाने के लिए व्हाइट शेड

डॉ. सियाराम ने बताया - ज्यादा पानी भरने से जड़ों में फंगस लग सकती है और पौधे खराब हो सकते हैं। तेज धूप में सनबर्न की समस्या भी आती है। इससे पौधा पीला पड़ने लगता है और उसकी बढ़वार रुक सकती है। इससे बचाव के लिए उन्होंने व्हाइट शेडनेट लगाया है, जो तेज धूप के साथ सर्दी से भी पौधों की सुरक्षा करता है।

मोरिंगा जैसे पेड़ लगाकर भी धूप से बचाव किया जा सकता है और उनसे अतिरिक्त आमदनी भी मिल सकती है। इसके अलावा व्हाइट क्ले का छिड़काव भी किया जा सकता है।