मैसूर, विश्वप्रसिद्ध मैसूर दशहरा में इस बार ‘जंबो सवारी’ में 61 साल का हाथी ‘अभिमन्यु’ आखिरी बार नजर आएगा। अभिमन्यु 26 साल से शाही यात्रा का हिस्सा रहा है। वह 2000 से लगातार 750 किलो का सोने का हौदा उठाकर मां चामुंडेश्वरी यात्रा की अगुवाई करता आया है।

डीसीएफ डॉ. आईबी प्रभु गौड़ा बताते हैं कि नियमों के अनुरूप अभिमन्यु पिछले साल रिटायर हो चुका है। मैसूर के लोगों के आग्रह पर उसे विदाई जुलूस की अगुवाई की अनुमति दी है। इसलिए अभिमन्यु को लेकर पैलेस के साथ पूरा मैसूर भावुक है। इसके बाद उसे मथिगोडु हाथी शिविर भेज देंगे।

इस बीच, 21 अक्टूबर तक चलने वाले मैसूर दशहरा उत्सव के समापन समारोह के लिए नए हाथियों को रेत की बोरियों और लकड़ी के हौदे से अभ्यास करा जा रहा है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार को कहा कि इस साल मैसूरु दशहरा में कंबाला और तुलुनाडु की झांकी शामिल होगी।

हाथी अभिमन्यु… इतना खास क्यों…

14 की उम्र से वन विभाग में सेवा दे रहा अभिमन्यु कर्नाटक का सबसे शक्तिशाली ‘कुमकी’ (जंगली हाथियों को काबू करने वाला) हाथी है। सबसे शांत, समझदार और अ​नुशासित, इसलिए कर्नाटक की शान है।

‘ऑपरेशन का बादशाह’ और ‘एके-47’ के नाम से मशहूर इस हाथी ने देशभर में 300 से अधिक हिंसक हाथियों और 80 से ज्यादा आदमखोर बाघों-तेंदुओं को पकड़वाने में मदद की। इसलिए इसे ‘कैप्टन अभिमन्यु’ भी कहते हैं।

3 दशक से हौदा संभाल रहे अकरम, भोजन प्रभारी रंगराज और महावत वसंता के लिए ये विदाई आंखें नम करने वाली है। वसंता के पिता अभिमन्यु के महावत रह चुके हैं। अब वे मथिगोडु कैंप में भी उसकी देखभाल करेंगे।

अभिमन्यु पर तीन किताबें लिख चुके ‘विजय कर्नाटक’ के संपादक रमेश उथप्पा ने उसकी विदाई के लिए भावुक गीत लिखा है, जो उसी दिन बजेगा।


हाथियों को मिलती है 8 घंटे पकी स्पेशल खिचड़ी दशहरे के हाथियों को कोई दवा नहीं दी जाती, बल्कि उनका स्पेशल भोजन हरे व लाल चने, चावल, नमक और प्याज डालकर 8 घंटे तक पकाया जाता है। फिर इसे ताजी कच्ची सब्जियां व फल मिलाकर परोसा जाता है। अभिमन्यु के बाद अब 750 किलो का सोने का हौदा उठाने के लिए धनंजय और प्रशांत नाम के शक्तिशाली हाथियों का ट्रेनिंग ट्रायल चल रहा है।

आमतौर पर जुलूस में 14 हाथी होते हैं, लेकिन इस बार अभिमन्यु को मिलाकर 13 हाथी जंबो सवारी का हिस्सा बनेंगे।

ऐतिहासिक: महिला अफसर को शाही यात्रा की कमान

मैसूर दशहरा के इतिहास में पहली बार किसी महिला रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर यशमा माचम्मा को हाथियों की टीम और पूरे उत्सव की तैयारियों की कमान मिली है। वे अभिमन्यु और पूरी गजसेना की मैसूर पैलेस में अगवानी करेंगी। माचम्मा कहती हैं कि मैसूर में महिला रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर पहले भी रह चुकी हैं, लेकिन यह पहली बार है जब दशहरा उत्सव में किसी महिला को जिम्मेदारी मिली है।