बैंक लॉकर में रखे लाखों रुपयों के सामान का हो गया नुकसान! कौन करेगा भरपाई?
Updated on
20-08-2026 05:02 PM
नई दिल्ली: आज के इस डिजिटल जमाने में बहुत ही जरूरी काम से ही लोग बैंक जाते हैं क्योंकि अधिकतर काम ऑनलाइन हो जा रहे हैं। एक खाते से दूसरे खाते में पैसों की लेनदेन करनी हो या फिर खाता संबंधित अन्य जानकारी लेनी हो, लोग अपने मोबाइल पर संबंधित बैंक एप और अन्य सुविधाओं के जरिए बिना बैंक जाए ऑनलाइन कहीं से भी ये सभी कार्य कर लेते हैं।बैंक इन सुविधाओं के अलावा अपने ग्राहकों को लॉकर की भी सुविधा देता है। इसके जरिए लोग अपने कीमती सामान, गहने, दस्तावेज और अन्य चीजों को सुरक्षित रखते हैं। लेकिन यहां सवाल यह है कि अगर बैंक लॉकर में रखे कीमती सामानों की चोरी हो जाती है या आग में नुकसान हो जाता है, तो इसकी भरपाई कौन करेगा? आइए जानते हैं कि इस मामले में आरबीआई का नियम क्या कहता है। इसके साथ ही हम यह भी जानेंगे कि बैंक किस मामले में मुआवजा दे सकता है और किस मामले में वह इसे नहीं दे सकता है।इन घटनाओं में बैंक की होगी जिम्मेदारी
देश के विभिन्न बैंकों के लॉकर में उसके ग्राहक लाखों और करोड़ों रुपयों के अपने कीमती सामान रखते हैं। हालांकि, नियम के तहत यह बैंकों को भी नहीं बताया जाता है कि ग्राहक ने लॉकर में कौन से सामान रखे हैं। इन सामानों को रखने के लिए पात्र ग्राहक बैंक को लॉकर के लिए सालाना किराया देते हैं। बैंक लॉकर में रखे इन सामानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित बैंक की होती है।अब सवाल यह है कि अगर बैंक में चोरी हो जाती है, आग लग जाती है, बैंक की लापरवाही के कारण कोई बड़ी अनहोनी हो जाती है, बैंक की इमारत गिर जाती है, बैंक का कोई कर्मचारी ही लॉकर में रखे सामानों को नुकसान पहुंचा देता है या बैंक में डकैती, सेंधमारी हो जाती है और इसकी वजह से लॉकर में रखे ग्राहकों के कीमती सामानों को नुकसान होता है तो इसकी भरपाई कौन करेगा? आरबीआई के नियम के तहत इन सभी घटनाओं में बैंक लॉकर में रखे सामानों को हुए नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी बैंक की होती है।ग्राहकों को मिलता है 100 गुना तक मुआवजा
आरबीआई के बैंक लॉकर नियम के तहत उक्त मामलों या घटनाओं में पूरी जिम्मेदारी बैंक की होती है। इसके साथ ही बैंक को इसके लिए अपने ग्राहकों को लॉकर के सालाना किराये का 100 गुना तक मुआवजा देना पड़ता है।उदाहरण के लिए मान लीजिए कि अगर आप बैंक लॉकर में रखे अपने किसी कीमती सामान के लिए सालाना तीन हजार रुपये का किराया दे रहे हैं तो इसका नुकसान होने पर बैंक को आपको 100 गुना यानी कि 3 लाख रुपये तक का मुआवजा देना पड़ सकता है।