
सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई की। मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को सूचित किया कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाएगी। कोर्ट ने मीडिया और मामले के दोनों पक्षों से मीडिया को बयान न देने का आग्रह किया।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “पीड़िता परिवार या दूसरे परिवार के बयान न लें। अन्यथा, एक वर्ग यह कह रहा है कि न्यायपालिका निष्पक्ष सुनवाई नहीं होने दे रही है। हमें अपनी राज्य एजेंसियों या सीबीआई पर कोई संदेह नहीं है। यह सिर्फ इसलिए है क्योंकि एक तरह का नैरेटिव गढ़ा जा रहा है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हुई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की निष्पक्ष और बिना किसी भेदभाव के जांच हो।
त्विषा के पिता नवनीधि शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने को न्याय व्यवस्था के लिए बड़ा कदम बताया है। उन्होंने कहा कि इससे लोगों का भरोसा मजबूत होगा और मामले में निष्पक्ष जांच की उम्मीद बढ़ेगी।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह को भोपाल कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग पर सुनवाई होगी। यह याचिका शासन और त्विषा के पिता की ओर से दायर की गई है। एसआइटी द्वारा तीन नोटिस दिए जाने के बावजूद गिरिबाला सिंह पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुई हैं। ऐसे में पुलिस उनकी अग्रिम जमानत निरस्त कराने के लिए आवेदन दाखिल करने पर विचार कर रही है।
मामले में आरोपित पति समर्थ सिंह को रिमांड पर लेकर SIT लगातार पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह की कॉल डिटेल रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है। दोनों की अन्य लोगों से बातचीत, मोबाइल चैट, लोकेशन और डिजिटल गतिविधियों को भी खंगाला जा रहा है।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मौत से पहले त्विषा किन लोगों के संपर्क में थी और उसकी आखिरी बातचीत किससे हुई थी।
रविवार को एम्स दिल्ली के डॉक्टरों की टीम ने त्विषा शर्मा के शव का दूसरा पोस्टमॉर्टम किया। इसकी रिपोर्ट हाई कोर्ट में बंद लिफाफे में सौंपी जाएगी। वहीं, भोपाल जिला अदालत में 12 मई से 20 मई तक की कॉल डिटेल और भोपाल एम्स के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने संबंधी आवेदन पर भी सुनवाई होगी।
हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति देवनारायण सिंह की एकलपीठ ने सोमवार को पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त करने की मांग पर सुनवाई 27 मई तक के लिए बढ़ा दी। कोर्ट ने इस मामले में दो अगल अलग आवेदनों को संयुक्त रूप से सुनवाई की व्यवस्था दे दी है। एक आवेदन त्विषा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा का है, जबकि दूसरा राज्य की ओर से दायर हुआ है।
राज्य के आवेदन पर नोटिस सर्व को चुका है। नवनिधि शर्मा के आवेदन पर नोटिस सर्व नहीं हुआ था। इसीलिए गिरिबाला के वकील ने नोटिस प्राप्त किया। कोर्ट ने पाया कि दोनों आवेदनों में ग्राउंड पृथक हैं। राज्य का आरोप है कि अग्रिम जमानत मिलने के बाद से गिरिबाला जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं।
मीडिया में बयानबाजी कर रही हैं। जबकि नवनिधि शर्मा का आरोप है कि गिरिबाला सिंह साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर रही हैं। इसलिए भोपाल की कोर्ट से पूव में मिली अग्रिम जमानत निरस्त कर दी जाए।