नए सिस्टम से ट्रेडर्स क्यों बेहाल? निवेशकों ने की CAS नियम वापस लेने की मांग, सेबी का इनकार
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07-08-2026 01:23 PM
नई दिल्ली: शेयर बाजार के नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम (CAS) ने ट्रेडर्स की नींद उड़ा दी है। आखिरी वक्त में कीमतों में होने वाले अचानक और बड़े बदलावों से निवेशकों को घाटा हो रहा है। जहां एक तरफ सोशल मीडिया पर इस सिस्टम को खत्म करने की मांग उठ रही है। वहीं, रेगुलेटर सेबी ने फिलहाल कोई भी बदलाव करने से मना कर दिया है।ET के मुताबिक, सोशल मीडिया पर हो रहे विरोध को देखते हुए मार्केट रेगुलेटर सेबी और एक्सचेंजों ने बड़े ब्रोकरों के साथ एक बैठक बुलाई। रेगुलेटर ने ब्रोकरों से कह दिया है कि फिलहाल CAS में बदलाव का उनका कोई इरादा नहीं है। उन्होंने ब्रोकरों को सलाह दी कि वे और ज्यादा ट्रेडर्स को इस सिस्टम में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करें।- क्या है पूरा मसला?
मसला क्लोजिंग ऑक्शन मसिस्टम (CAS) को लेकर है। यह फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट के करीब 200 शेयरों की क्लोजिंग प्राइस (बाजार बंद होने वाली कीमत) तय करने का एक नया तरीका है। पुराना सिस्टम: दोपहर 3:00 से 3:30 बजे के बीच होने वाले ट्रेड के एवरेज प्राइस के आधार पर क्लोजिंग तय होती थी। नया सिस्टम (CAS): यह प्रक्रिया करीब 20 मिनट (दोपहर 3:15 से 3:35 बजे तक) चलती है। इसमें पहले एक्सचेंज खरीदने और बेचने के ऑर्डर जमा करता है और फिर उन्हें मैच करके एक सिंगल ऑफिशियल क्लोजिंग प्राइस तय करता है। - Algo ट्रेडिंग पर क्या असर पड़ा है?
अल्गोरिथम ट्रेडिंग को सबसे ज्यादा चोट पहुंची है। ट्रेडर्स के कंप्यूटर मॉडल्स और फॉर्मुले पिछले तीन दिनों के अचानक आए उतार-चढ़ाव को समझ नहीं पा रहे हैं। इसकी वजह यह है कि ज्यादातर Algos पुराने रेकॉर्ड्स और पुराने क्लोजिंग पैटर्न के हिसाब से बनाए गए थे, न कि इस नए ऑक्शन सिस्टम के लिए। - लोगों का क्या कहना है?
वेव एनालिटिक्स के फाउंडर पीयूष चौधरी का कहना है कि CAS के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि ट्रेडर्स यह समझ ही नहीं पा रहे हैं कि क्लोजिंग प्राइस क्या होगी, क्योंकि इस सिस्टम में बहुत ज्यादा अनिश्चितता है। प्रोफेशनल ट्रेडर्स ऑर्डर के बहाव, नकदी, डेरिवेटिव्स की पोजीशन और पुराने रेकॉर्ड देखकर कीमतों का अंदाजा लगाते हैं। लेकिन जब कीमतें उम्मीद से बिल्कुल अलग निकलती हैं, तो उनकी पूरी रणनीति फेल हो जाती है और उन्हें अचानक बड़ा नुकसान हो जाता है। - सेंसेक्स-निफ्टी में क्यों दिख रहा है अंतर?
पिछले तीन दिनों में दोनों इंडेक्स में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा गया। गुरुवार को सेंसेक्स 373.76 अंक (0.48%) की मजबूती के साथ 78,954.76 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी महज 11.35 अंक (0.05%) की बढ़त के साथ 24,636 पर बंद हुआ। इससे पहले बुधवार को सेंसेक्स एक समय 0.2% और निफ्टी 0.5% तक गिर गया था। लेकिन जब बाजार बंद हुआ, तो सेंसेक्स 0.19% ऊपर रहा, जबकि निफ्टी लगभग बराबर (फ्लैट) बंद हुआ। - चाल अलग-अलग क्यों?
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम (CAS) की वजह से सेंसेक्स और निफ्टी की चाल अलग-अलग दिख रही है। असल में निफ्टी के शेयरों में बड़े संस्थानों का लेनदेन ज्यादा होता है, इसलिए ऑक्शन के दौरान निफ्टी की कीमतों पर ज्यादा असर पड़ता है, जबकि सेंसेक्स पर इसका असर फिलहाल कम दिख रहा है। फरीदाबाद की शिखा गुप्ता का कहना है कि दोपहर 3.15 बजे जो सौदा फायदे में दिख रहा होता है, वह अचानक घाटे में बदल जाता है।