ब्रिटिश कंपनी की जहरीली विरासत, कैमोर शहर में पड़ा है 10 लाख टन 'जहर', बीमारी की चपेट में हैं हजारों लोग
Updated on
25-09-2026 01:23 PM
कटनी: कैमोर में भारत की पहली एस्बेस्ट फैक्ट्री है। इसके खुलने के एक सदी बाद ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर ने इस अंग्रेजी विरासत को दुनिया के सामने रखा है। उसकी रिपोर्ट के अनुसार यह पता चला है कि कटनी जिले में स्थित कैमोर शहर में अभी भी 10 लाख टन एस्बेस्टस के प्रदूषित कचरे हैं। यह कचरा दशकों तक यहां डाला गया था और इसका सीधा संबंध ब्रिटेन की सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली कंपनी टर्नर एंड न्यूऑल से है।
एमपी सरकार के पास नहीं है कोई रिकॉर्ड
कटनी स्थित कैमोर की चर्चा अब वैश्विक स्तर पर हो रही है। इस बीच सबसे रहस्यमयी बात यह है कि मध्य प्रदेश सरकार के पास कोई ऐसा रिकॉर्ड नहीं है, जिससे यह पता चल सके कि इस शहर में रहने वाले कितने लोग एस्बेस्टल रेशों के संपर्क में आए। साथ ही कितने लोगों को एस्बेस्ट से जुड़ी बीमारी हुई है। कितने लोगों की जांच हुई और कितने लोगों की मौत इसके असर से हुई है।
1933 में स्थापित हुई थी यह फैक्ट्री
कैमोर में भारत की पहली एस्बेस्टस फैक्ट्री थी, जिसे ब्रिटिश हुकूमत के दौरान 1933 में स्थापित किया गया था। बाद में यह प्लांट एस्बेस्टस की प्रमुख कंपनियों में से एक टर्नर एंड न्यूऑल से जुड़ गया। इसके बाद 1988 में इसे एटरनिट बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को बेच दिया गया। 2001 में एवरेस्ट इंडस्ट्रीज ने इसे खरीद लिया। कंपनी के मालिक बदलते रहे, लेकिन एस्बेस्टस का कचरा गायब नहीं हुआ।
इससे हो रहीं बीमारियों के सबूत मिले
दरअसल, ओआई की जांच में सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली के बाहर के रिकॉर्ड और मेडिकल जांचों में एस्बेस्टस से जुड़ी बीमारी और इसके संपर्क में आने के सबूत मिले हैं। ब्रिटिश बैरिस्टर कुष्णेंदु मुखर्जी कई सालों से कैमोर के निवासियों को मुआवजा दिलाने में मदद कर रहे हैं, जबकि चेन्नई के जनरल सर्जरी के प्रोफेसर डॉ मुरलीधर वेंकटेश्वरन ने निवासियों की जांच के लिए यहां का दौरा किया है। इस इलाके में लगभग हर कोई इससे प्रभावित है।
स्थानीय प्रशासन ने दांवों की जांच नहीं की
उन्होंने कहा कि यूके के एक एस्बेस्टस ट्रस्ट ने कैमोर से आए दावों को स्वीकार किया है। कनाडा की एक पर्यावरण जांच रिपोर्ट में कैमोर और कल्हारा के कुछ हिस्सों में एस्बेस्टस प्रदूष की पुष्टि की गई है। फिर भी राज्य सरकार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय प्रशासन के पास स्वास्थ्य संबंधी कोई ऐसा इकट्ठा रिकॉर्ड नहीं है, जिसके आधार पर इन दावों की जांच की जा सके।
मुआवजे भी मिले
वहीं, यूके के फेडरल-मोगुल ग्रुप के एडमिनिस्ट्रेशन से बाहर निकलने के बाद 2006 में बने टी एंड एन यूके एस्बेस्ट ट्रस्ट ने बताया कि उसने भारतीय नागरियों के 3849 दावों का निपटारा किया है। जिनकी कुल राशि 141 करोड़ रुपए थी। यह आंकड़ा ट्रस्ट द्वारा संभाले गए भारतीय दावों को दिखाता है और यह सिर्फ कैमोर के लिए नहीं है।
ट्रस्ट प्लांट के पूर्व कर्मचारियों, उनके परिवारों और पर्यावरण के कारण इसके संपर्क में आए लोगों के दावे स्वीकार करता है। लेकिन ट्रस्ट के पास कैमोर प्लांट का कोई पुराना रिकॉर्ड नहीं है।
ऐनी ओकीफ, डायरेक्टर, टी एंड एन एस्बेस्ट ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड
1988 में बेच दी कंपनी
ओकीफ ने यह भी कहा कि हमारे पास कैमोर में प्लांट से जुड़ा कोई रिकॉर्ड नहीं है। ट्रस्ट ने बताया कि फैक्ट्री एक जनवरी 1988 को एटरनिट बिल्डिंग प्रोडक्ट्स लिमिटेड को बेच दी गई थी। माना जाता है कि बिक्रि के हिस्से के तौर पर कंपनी के रिकॉर्ड भी उन्हें सौंप दिए गए थे।
ब्रिटिश कंपनी ने अपने काम के दौरान कर्मचारियों को काफी ज्यादा धूल के संपर्क में रखा।
कृष्णेंदु मुखर्जी, ब्रिटिश बैरिस्टर
2000 से ज्यादा लोग हैं पीड़ित
इसके साथ ही कृष्णेंदु मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने 2012 में मेडिकल कैंप आयोजित करना और निवासियों को दावे दायर करने में मदद करना शुरू किया था। दावों और मेडिकल प्रक्रिया के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 1200 लोगों को मुआवजा मिला है। बीमारी के लगभग 300 नए दावों पर कामों चल रहा है और 2000 से ज्यादा लोगों ने एस्बेस्टस से जुड़ी बीमारियों की पहचान हुई है। ये आंकड़े सरकार द्वारा प्रमाणित महामारी संबंधी गिनती नहीं हैं।
इलाज सुविधाओं की जरूरत
वहीं, चेन्नई में जनरल सर्जरी के प्रोफेसर डॉ मुरलीधर वेंकटेश्वरन यहां निवासियों की जांच और उनके दावों पर काम करने में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि शहर में सही स्क्रीनिंग और इलाज की सुविधाओं की जरूरत है।
सरकार को कैमोर में एस्बेस्टोसिस और फेफड़ों के कैंसर के मरीजों की पहचान और इलाज के लिए बेहतर मेडिकल सेंटर बनाना चाहिए क्योंकि लगभग हर कोई इससे प्रभावित है।
डॉ मुरलीधर वेंकटेश्वरन
लंग्स की बीमारी से ज्यादातर लोग पीड़ित
उन्होंने कहा कि कई प्रभावित निवासी इलाज और सांस लेने में मदद के लिए बार-बार यात्रा करने का खर्च नहीं उठा सकते। उन्होंने कहा कि उनके पास कैमोर से 138 किमी दूर जबलपुर तक यात्रा करने के लिए पैसे नहीं हैं। उन्होंने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर या ऑक्सीजन सिलेंडर लेने के लिए दूर नहीं जाना पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि कैमोर शहर से आठ किमी दूर विजयराघौगढ़ में सरकारी एक्स-रे सुविधा में सिर्फ 50 एमए की मशीन थी।
डॉ मुरलीधर वेंकटेश्वन ने कहा कि इन बीमारियों का जल्दी पता लगाने के लिए हमें कम से कम 300 एमए की मशीन की जरूरत है। वेंकटेश्वरन ने कहा कि फेफड़ों के कैंसर और मेसोथेलियोमा का जल्दी पता लगाने के साथ-साथ फेफड़ों की कार्यक्षमता की जांच और निगरानी के लिए हाई-रिजॉल्यूशन स्कैन की जरूरत होती है। सांस लेने में तकलीफ वाले मरीजों को फिजियोथेरेपी, ऑक्सीजन सपोर्ट, गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज और दवाओं की भी जरूरत होगी।
मेडिकल सुविधाओं को बढ़ाने पर जोर
उन्होंने कहा कि उन्हें ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज और फिजियोथेरेपी की जरूरत होगी। दवाएं चाहिए। डॉक्टर ने कहा कि सांस की गंभीर बीमारी दिल पर असर डाल सकती है। एक मरीज का उदाहरण देते हुए कहा कि यह सिर्फ फेफड़ों की बात नहीं है, बल्कि यह दिल से भी जुड़ा है। उस मरीज की बाद में हार्ट फेलियर से मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि असल में, इसके लिए आपके पास एक अच्छा, हाई-एंड मेडिकल सेंटर होना चाहिए।
मंडला के पाठा सिहोरा स्थित राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह सरकारी छात्रावास में 6वीं कक्षा के 3 जूनियर छात्रों के साथ मारपीट का मामला सामने आया है।आरोप है कि 7वीं-8वीं के…
21 साल बाद मध्य प्रदेश में सरकारी बस सेवा लौट रही है। 25 सितंबर यानी आज मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत CM मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी…
कटनी: कैमोर में भारत की पहली एस्बेस्ट फैक्ट्री है। इसके खुलने के एक सदी बाद ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर ने इस अंग्रेजी विरासत को दुनिया के सामने रखा है। उसकी रिपोर्ट के…
भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार के लिए कनाडा से भोपाल आ रहा बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 विमान को लेकर हर दिन नई-नई जानकारी सामने आ रही हैं। डीजीसीए के कड़े नियमों, पायलटों की…
अशोकनगर: मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में अद्वैत मत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री आनंदपुर ट्रस्ट में इन दिनों 198 पाकिस्तानी श्रद्धालु ठहरे हुए हैं। ये सभी श्रद्धालु आगामी 12 अक्टूबर…
पुरी : ओडिशा के मलकानगिरी में चक्रवात 'अर्नब' ने तबाही मचाई है। लगातार बारिश से ओडिशा का मलकानगिरी जिला पानी में डूब चुका है। बारिश के साथ तेज हवाओं के…
झज्जर: हरियाणा के झज्जर में गैंगस्टर मैनपाल ढिल्ला आज अपनी कंबोडियन पार्टनर मेटाचान से शादी करने जा रहा। कोर्ट से मिली 12 घंटे की कस्टडी पैरोल के तहत उसे सुबह…