
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग को SIR के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है और यह मनमाना नहीं है।
कोर्ट ने चुनाव आयोग को संदिग्ध नागरिकता के आधार पर वोटर लिस्ट से हटाए गए व्यक्तियों के नाम चार हफ्ते में केंद्र सरकार को भेजने का निर्देश भी दिया है।
चुनाव आयोग ने 11 महीने पहले विधानसभा चुनाव वाले बिहार से SIR की शुरुआत की थी। इसके बाद पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी में SIR कराया गया। असम में स्पेशल रिवीजन (SR) हुआ था।
इन राज्यों में करीब 2.65 करोड़ वोटर के नाम कटे थे। सबसे पहले बिहार SIR का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। इस प्रक्रिया के खिलाफ इन राज्यों से कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं। कुल कितनी याचिकाएं थीं इसकी जानकारी नहीं है।