'कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन', पाकिस्तान के सामने UN का हवाला देकर OIC ने उगला जहर
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23-09-2026 11:53 AM
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के इतर 'ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन' (OIC) के जम्मू-कश्मीर कांटेक्ट ग्रुप की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। न्यूयॉर्क में हुई इस बैठक में OIC ने कश्मीर के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार के प्रति अपना समर्थन दोहराया। ये वही ओआईसी है जो आज तक बलूचिस्तान, पीओके जैसे जगहों पर पाकिस्तानी सेना की तरफ से किए जा रहे नरसंहार पर चुप्पी साध रखी है।ओआईसी की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है 'संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान जम्मू-कश्मीर पर ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन' के मंत्री-स्तरीय संपर्क समूह की बैठक हुई। OIC के महासचिव इस्माइल ओल्ड शेख अहमद ने दक्षिण एशिया में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के आधार के तौर पर कश्मीरी लोगों के आत्मनिर्णय के अटूट अधिकार का समर्थन करने के संगठन के संकल्प को दोहराया। यह समर्थन सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुरूप है।'OIC ने सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का दिया हवाला
ओआईसी की तरफ से एक्स पर जारी एक बयान में कहा गया है 'ओआईसी के महासचिव ने क्षेत्र में मानवीय स्थिति, मानवाधिकारों और सुरक्षा हालात पर चिंता जताई। उन्होंने क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय स्थिति का सम्मान करने और 2019 के बाद उठाए गए एकतरफा और गैर-कानूनी कदमों को वापस लेने की मांग दोहराई। साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की इस बात का स्वागत किया कि 1949 से अपनाए गए सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्ताव अभी भी लागू हैं।'बयान में आगे कहा गया है 'उन्होंने मानवाधिकारों की रक्षा, घटनाओं का पारदर्शी तरीके से दस्तावेजीकरण करने और कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को और तेज़ करने का भी आग्रह किया।'कश्मीर पर ओआईसी की बैठक की बड़ी बातें
अनुच्छेद 370 पर बयान- OIC के महासचिव ने भारत सरकार की तरफ से 2019 में कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने को लेकर बयान दिया है। उन्होंने क्षेत्र में उठाए गए एकतरफा और अवैध कदमों को वापस लेने की मांग की।मानवाधिकारों की सुरक्षा- ओआईसी ने क्षेत्र में मानवाधिकारों, मानवीय स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है।सुरक्षा परिषद का हवाला- इसके अलावा ओआईसी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि कश्मीर के मुद्दे को वैश्विक मंचों पर बनाए रखा जाए और घटनाओं का पारदर्शी दस्तावेज तैयार किया जाए। संयुक्त राष्ट्र की तरफ से 1949 के बाद से पारित किए गए सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के लागू रहने की पुष्टि का भी बैठक में स्वागत किया गया।ओआईसी को लेकर भारत का क्या रुख रहा है?
भारत ने हमेशा से ओआईसी के कश्मीर पर दिए गये बयानों को सिरे से खारिज किया है। ये बयान पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों से प्रभाव में दिलाए जाते हैं। दिल्ली का कहना है कि ओआईसी को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग था, है और हमेशा रहेगा। ऐसे में किसी बाहरी संगठन या OIC को इस पर टिप्पणी करने का कोई हक नहीं है। भारत का कहना रहा है कि ओआईसी अपने मंच का दुरुपयोग करने दे रहा है और पाकिस्तान जैसे देश अपने निहित स्वार्थों और झूठे प्रचार के लिए इस मंच का इस्तेमाल कर रहे हैं।