
भोपाल। कमर्शियल सिलिंडरों और पांच किलो वाले छोटू सिलिंडर के दाम फिर बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर खानपान सेवाओं पर पड़ा है। बड़े होटलों के साथ अब स्ट्रीट फूड का जायका भी तीखा हो गया है।
नई बढ़ोतरी के साथ ही भोजन की खाली महंगी हो गई है। कुछ ही समय में सिलिंडर के दाम डेढ़ गुना होने के कारण होटल संचालकों ने मेनू में बदलाव के साथ भाव भी बढ़ा दिए हैं। कचौड़ी, समोसा और पोहा जैसे स्ट्रीट फूड भी महंगे हो रहे हैं।होटल एवं कैटरिंग व्यवसाइयों का कहना है कि हाल ही में पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ने के साथ परिवहन लागत बढ़ गई है। अब कामर्शियल सिलिंडरों के दाम माह-दर-माह बढ़ाए जा रहे हैं, इससे खानपान सेवाओं का संचालन महंगा होने लगा है। पिछले माह कामर्शियल प्रति सिलिंडर 993 रुपये बढ़ाए गए। अब 42 रुपये बढ़ाए गए हैं। भोजन बनाने का सबसे बड़ा खर्च गैस, तेल एवं मसाले हैं। तीनों महंगे हो चुके हैं।
इस कारण होटल संचालकों को दाम बढ़ाने पड़े हैं। रोटी से लेकर दाल, पनीर तक महंगा हो गया है। प्रति डिश लगभग 10 प्रतिशत तक की ब़ढ़ोतरी की जा चुकी हैं। कुछ होटल संचालकों ने तवा रोटी बनाना बंद कर दी है। अब उनके मेनू में तंदूरी रोटी का ही विकल्प है। तवा रोटी बनाने में गैस का अधिक उपयोग होता है।
हाल ही में तंदूर के संचालन को पुन: अनुमति दी गई है। चाट, समोसा, कचौरी, मोमोज, चाय और अन्य फास्ट फूड बेचने वाले छोटे कारोबारियों का कहना है कि उनकी कमाई का मार्जिन पहले ही सीमित है। गैस महंगी होने के कारण दाम बढाना मजबूरी है।