
शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ की कांग्रेस (भूपेश) सरकार से उन्हें नक्सल उन्मूलन में सहयोग नहीं मिला। बस्तर के नक्सल मुक्त होने के बाद 70 कैंपों में से लगभग एक-तिहाई कैंपों को ‘वीर शहीद गुंडाधर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा।
गृहमंत्री ने आगे कहा कि हर आदिवासी महिला को पशुपालन से जोड़ने की योजना है। बस्तर के हर आदिवासी नागरिक को एक गाय और एक भैंस देंगे। 6 महीने में बस्तर में बड़ा डेयरी नेटवर्क बनेगा।
नक्सल उन्मूलन में सहयोग नहीं मिलने के आरोप पर पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि अमित शाह से बड़ा झूठा कोई नहीं है। उन्होंने हमसे ही सीखा है। काम हमारा है और नाम ये ले रहे हैं। रिकॉर्ड सब बता देगा, जाकर देख लीजिए।
इस पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि कांग्रेस के लोग झूठ बोलने में माहिर हैं। भूपेश बघेल ने झूठ बोलने में पीएचडी कर रखी है।
बैठक में 4 राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में जगदलपुर में हुई इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शामिल हुए।
बैठक में राज्यों के विकास के साथ-साथ गंभीर सामाजिक और सुरक्षा मुद्दों पर कड़े फैसले लिए गए हैं। बैठक में चारों राज्यों में अपराध नियंत्रण, विशेषकर महिलाओं के उत्पीड़न और रेप जैसे मामलों पर जल्द फैसले लेने पर चर्चा की गई।
जल-जंगल-जमीन को बेचने की प्लानिंग- बैज
इधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की अगुआई में कांग्रेसियों ने अमित शाह से बस्तर को मुद्दों पर चर्चा करने की मांग की थी। हालांकि, प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। इस पर दीपक बैज ने कहा कि मध्य क्षेत्रीय परिषद बैठक सिर्फ खानापूर्ति है।
यहां बस्तर के जल-जंगल-जमीन को बेचने और उद्योगपतियों को लाने की प्लानिंग चल रही है। इसलिए अमित शाह और चारों मुख्यमंत्री हमसे चर्चा करने में डर गए। असली प्लानिंग बस्तर का विकास के लिए नहीं बल्कि बस्तर के खनिज संसाधन को बेचने की प्लानिंग चल रही है।
वर्चुअल हो सकती थी बैठक- दीपक बैज
बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक को लेकर PCC चीफ दीपक बैज ने तंज कसा। बैज के मुताबिक एक तरफ प्रधानमंत्री देश से पेट्रोल-डीजल बचाने और वर्क फ्रॉम होम करने का आह्वान करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके ही गृहमंत्री और मुख्यमंत्री उनकी बातों को हवा में उड़ा रहे हैं।
जब केंद्रीय गृह मंत्रालय और सभी राज्यों के मुख्यमंत्री सचिवालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की हाईटेक सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं, तो इस बैठक को वर्चुअल भी किया जा सकता था।