
शुरुआती पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपित पिछले करीब दो वर्षों से पश्चिम बंगाल से नकली नोट प्राप्त कर खपाने का काम कर रहा था। नोट देने वाले आरोपित से उसका दो साल से भी पुराना परिचय है। दोनों की बीच की मोबाइल चैट भी पुलिस को मिली है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो (आइबी) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने भी अपनी जांच शुरू कर दी है। कोहेफिजा पुलिस ने दोनों एजेंसियों से संपर्क किया था, जिसके बाद आधा दर्जन अधिकारियों ने कोहेफिजा थाने पहुंचकर मामले की जानकारी लेना शुरू किया।
पुलिस के अनुसार सैफुल इस्लाम ने पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। उसने बताया कि मालदा में सक्रिय कुछ लोगों के संपर्क में आने के बाद वह नकली नोटों के कारोबार से जुड़ा। हालांकि उसने अभी तक यही बताया कि 28 मार्च को पहली बार वह दो लाख रुपये के नकली नोट भोपाल लाया था। लेकिन उसकी चैट में कई अहम जानकारियां हैं।
आरोपित ने यह भी बताया कि उसने नकली नोट को कैश डिपॉजिट मशीन में जमा किए थे, लेकिन नोट जमा नहीं हो पाए थे। जिसके बाद से वह दुकानों और मॉल में खरीदारी करता था। साथ ही सस्ते दाम पर जाली नोट खरीदने वालों को तलाशता था।
भोपाल पुलिस अब मालदा में उन ठिकानों की पहचान कर रही है, जहां नकली नोट तैयार और सप्लाई किए जाते थे। एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि जाली नोट तैयार करने में उपयोग होने वाला कागज और अन्य सामग्री कहां से लाई जा रही थी। प्रारंभिक जांच में सीमापार नेटवर्क की आशंका भी जताई जा रही है।
बता दें कि कोहेफिजा पुलिस ने सैफुल इस्लाम को 500-500 रुपये के 280 नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ में सामने आया था कि वह नकली नोटों को 200 से 300 रुपये में बेच देता था और बाजार में खरीदारी के दौरान भी उनका इस्तेमाल करता था। पुलिस को उसके पास से विदेशी सिम कार्ड, कई बैंक खातों के दस्तावेज और साइबर ठगी से जुड़े सुराग भी मिले थे।