- अभी क्या है नियम?
अभी के नियमों के मुताबिक, म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए पैसा सीधे निवेशक के अपने बैंक खाते से ही आना चाहिए। यह पैसा सिर्फ आरबीआई से मान्यता प्राप्त पेमेंट गेटवे या सेबी द्वारा अधिकृत संस्थानों के जरिए ही भेजा जा सकता है। लेकिन सेबी अब कुछ ऐसी स्थितियां तय करना चाहता है जहां किसी और के खाते से भुगतान की अनुमति दी जा सके, बशर्ते इससे निवेशक की सुरक्षा और मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) से जुड़े कानूनों का उल्लंघन न हो। - क्या है सेबी का प्रस्ताव?
कोई कंपनी अपने कर्मचारियों की सैलरी से पैसे काटकर उनकी तरफ से म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकती है। नए नियम से म्यूचुअल फंड कंपनियां सीधे सैलरी से होने वाले निवेश को स्वीकार कर सकेंगी।एजेंटों को यूनिट्स: सेबी का दूसरा सुझाव यह है कि म्यूचुअल फंड कंपनियां (AMCs) अपने एजेंटों को उनके कमीशन के बदले नकद पैसे देने के बजाय म्यूचुअल फंड की यूनिट्स दे सकती हैं। इससे एजेंटों के लिए निवेश करना आसान होगा और वे लंबे समय के लिए बचत करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।समाज सेवा के लिए दान: सेबी ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि निवेशक अपने निवेश या मुनाफे का एक हिस्सा किसी सामाजिक कार्य के लिए दान कर सकें। इसके लिए एक पारदर्शी और सुरक्षित सिस्टम बनाया जाएगा। - सुरक्षा का क्या होगा?
KYC अनिवार्य: गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सेबी ने कई सुझाव दिए हैं। इसमें पैसा देने वाले और जिसे यूनिट्स मिल रही हैं, दोनों का KYC अनिवार्य होगा। सेबी ने इन प्रस्तावों पर 10 जून तक जनता से सुझाव मांगे हैं।इलेक्ट्रॉनिक रेकॉर्ड: पैसे के लेन-देन का पूरा इलेक्ट्रॉनिक रेकॉर्ड रखना होगा। MF कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नियम पारदर्शी हों और जिसे यूनिट्स मिल रही हैं, वह जब चाहे उन्हें बेचकर पैसे निकाल सके।

