
काफी कोशिशों के बाद केंद्र सरकार ने इन सिंधी महिलाओं और उनके रिश्तेदारों को शादी के लिए भारत आने का वीजा जारी किया। पाकिस्तान से दुल्हनें और उनके रिश्तेदार मस्कट, दुबई, श्रीलंका और दूसरे देशों के रास्ते भारत पहुंचे हैं।
नागपुर के नेता राजेश झांबिया ने रविवार को बताया कि आखिरकार उनका लंबा इंतजार खत्म हो गया है। पहलगाम हमले से पहले भारत में शादी के लिए पाकिस्तान के सिंध प्रांत की महिलाएं वाघा-अटारी बॉर्डर को चुनती थीं।
पाकिस्तान से आए सिंधी प्रवासियों के लिए काम करने वाले झांबिया ने PTI को बताया कि इस तरह की शादियों के लिए सिंधी समुदाय के लोग पहले पंजाब में वाघा-अटारी सीमा से भारत आते थे।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद हालात बदल गए। सरकार ने अटारी मार्ग से भारत आने की योजना बना रहे सभी लोगों के वीजा आवेदन खारिज कर दिए।
ऑपरेशन सिंदूर भारत की ओर से 2025 में चलाया गया सैन्य अभियान था। इसे जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था। इस हमले में 26 आम नागरिकों की मौत हुई थी।
शादानी दरबार ने तैयार की दुल्हनों की लिस्ट
झांबिया ने बताया कि इसके बाद उन्होंने रायपुर के संत युधिष्ठिरलाल शादानी से संपर्क किया। शादानी पाकिस्तान के सिंध प्रांत के घोटकी में स्थित प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थल शादानी दरबार के चीफ हैं।
उन्होंने कहा कि शादानी दरबार ने भारत में रहने वाले पुरुषों से सगाई कर चुकी पाकिस्तानी महिलाओं की सूची बनानी शुरू की। इस सूची में करीब 150 दुल्हनें थीं, जिनकी शादी नागपुर, रायपुर, जोधपुर, पुणे और भारत के दूसरे शहरों में होनी थी।
मंदिर ने यह लिस्ट गृह मंत्रालय को भेजी और दुल्हनों समेत उनके परिवारों को भारत आने के लिए वीजा देने की अपील की। झांबिया के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने इन लोगों को भारत आने की मंजूरी इस शर्त पर दी कि वे हवाई मार्ग से यात्रा करेंगे।
अप्रैल से 150 दुल्हनें भारत आईं
झांबिया ने बताया कि इस साल अप्रैल से पाकिस्तान की 150 दुल्हनें और उनके परिवार शादी के लिए दुबई, ओमान, श्रीलंका, बांग्लादेश और दूसरे देशों के रास्ते भारत आ चुके हैं। इनमें नागपुर से जुड़े 15 मामले शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में ऐसी करीब 300 और महिलाएं हैं, जो अभी इंतजार कर रही हैं। इन महिलाओं के लिए भी भारत सरकार से वीजा जारी करने की अपील की गई है।
दुल्हनें पाकिस्तानी क्यों…
सिंध का हिंदू सिंधी समुदाय भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के बावजूद दोनों तरफ पारिवारिक और धार्मिक रिश्ते बनाए हुए है। घोटकी का शदाणी दरबार इसी सीमा-पार सिंधी हिंदू समुदाय के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र है।
इसका संबंध 18वीं सदी के संत संत शदाराम साहिब से माना जाता है। इसके वर्तमान पीठाधीश संत युधिष्ठिरलाल शदाणी रायपुर में रहते हैं और इसी नेटवर्क ने इन फंसी हुई शादियों के मामलों को भारतीय अधिकारियों तक पहुंचाने में भूमिका निभाई।