देश की ‘मिल्क कैपिटल’ बनने की ओर मध्य प्रदेश, पीएम मोदी के 12 साल और मोहन सरकार के प्रयासों से डेयरी क्षेत्र में बड़ी क्रांति

Updated on 13-06-2026 11:49 AM
भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल को 12 वर्ष पूर्ण हो गए हैं। देश की आर्थिक-सामाजिक-कूटनीतिक दृष्टि से यह 12 वर्ष सफलतम वर्ष रहे हैं। इन वर्षों में एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विकास को और अधिक गति प्रदान की, तो दूसरी तरफ मध्यप्रदेश को भी प्रगति के पथ पर आगे ले गए। मध्यप्रदेश को उनका भरपूर आशीर्वाद मिला। इस आशीर्वाद का परिणाम यह रहा कि आज मध्यप्रदेश दूथ की कैपिटल बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। वह दिन दूर नहीं, जब दूध और दही के मामले में प्रदेश अन्य राज्यों को काफी पीछे छोड़ देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने के बीच देश का ह्रदयप्रदेश कहा जाने वाला मध्यप्रदेश अपनी समृद्ध वन संपदा, राष्ट्रीय उद्यानों और विशाल पशुधन के कारण भारत में पशु कल्याण और संरक्षण का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। केन्द्र की मोदी सरकार की दूरदर्शी योजनाओं और डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के सक्रिय और समन्वित प्रयासों ने मध्यप्रदेश में पशुधन विकास, गौ-संरक्षण तथा वन्यजीव संरक्षण को एक नई दिशा दी है। इन प्रयासों से न केवल पशुओं के स्वास्थ्य और संरक्षण में सुधार हुआ है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। केन्द्र की मोदी सरकार और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संयुक्त प्रयासों से एमपी में पशुपालन के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हुआ है। प्रदेश की मोहन सरकार ने पशुओं की रक्षा, संरक्षण और संवर्धन को न केवल धार्मिक-सांस्कृतिक दृष्टि से बल्कि आर्थिक विकास और किसानों की आय वृद्धि के प्रमुख साधन के रूप में अपनाया है।केन्द्र सरकार की पहल से ग्रामीण अर्थव्यस्था को मिलेगी बूस्टर डोज

केन्द्र सरकार ने पशु कल्याण को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चला रही है, जिनका मध्यप्रदेश में प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत प्रदेश में देशी नस्लों के संरक्षण, संवर्धन और नस्ल सुधार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इससे मध्यप्रदेश में उच्च गुणवत्ता वाले दुधारू पशुओं का तेजी से विकास हो रहा है। इसी तरह से राष्ट्रीय पशुधन मिशन पशुधन उत्पादकता बढ़ाने, स्वास्थ्य सुविधाओं और बीमा के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण के अनेक कार्यक्रमों के माध्यम से टीकाकरण, मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों और महामारी नियंत्रण पर फोकस किया जा रहा है। राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम और पशुधन सांख्यिकी सर्वेक्षण से पशुपालकों को सब्सिडी, ऋण और तकनीकी सहायता मिल रही है, जिससे दुग्ध उत्पादन प्रदेश में तेजी से बढ़ रहा है। सहकारी क्षेत्र की अत्याधुनिक केंद्रीय राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला राजधानी भोपाल में स्थापित की जा रही है जिसके निर्माण के लिए भारत सरकार द्वारा राज्य को 12 करोड़ 40 लाख रु का अनुदान दिया गया है। इस प्रयोगशाला के स्थापित होने से दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा।



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